नमन करूँ मैं इस धरती माँ को,

जिसने मुझको आधार दिया, 

पल पल मर कर जीने का,

सपना ये साकार किया !

हिम शिखर के चरणों से मैं,

दुःख मिटाने निकला था,

किसी ने रोका मुझे भंवर में,

कोई प्यासा दूर खड़ा था !

कभी आँखों से टपका मैं, 

कभी बादल बनकर बरसा हूँ,

कभी सिमट कर इस माटी में,

नदी नालों में बहता हूँ !

कब कहाँ किसके काम आऊँ,

मैं कहाँ इतना ज्ञानी हूँ !

सब के तन मिटे इस माटी में,

मैं तो फिर भी पानी हूँ ! – रचना – राजेन्द्र सिंह कुँवर ‘फरियादी’http://bikhareakshar.blogspot.in/

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Comment by That's Me Editor on March 3, 2013 at 11:36am

सुन्दर रचना बंधुवर.....

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