मैं माटी का दीपक हूँ ......

मैं माटी का दीपक हूँ ।

शाम ढले जल जाता हूँ

रात रात भर जलता रहता

तम को चिर भगाता हूँ

मैं माटी का दीपक हूँ ।

मैं माटी का दीपक हूँ ।

सुबह हुई मैं ढल जाता हूँ

रातों की तन्हाई में भी

कभी नहीं घबराता हूँ

, मैं माटी का दीपक हूँ ।

मैं माटी का दीपक हूँ ।

तेल मिला फिर बाती आई

सबने मिलकर जोत जलाई

राज की बात बताता हूँ ,

मैं माटी का दीपक हूँ ।

मैं माटी का दीपक हूँ ।

बच्चों तुम भी मिलकर रहना

दुश्मन को भी मार भगाना

यह सन्देश सुनाता हूँ ,

मैं माती का दीपक हूँ ।

डॉ अ कीर्तिवर्धन

8265821800

Views: 1

Comment by tejwani girdhar on February 4, 2013 at 8:36pm
very nice

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